Monday, May 27, 2019

प्रेम असावं.....

प्रेम असावं शुभ्र आकाशासारखं 
तळपत्या उन्हातही आल्हाददायक वाटावं असं

प्रेम असावं चांदण्यासारखं
काळोखातही आधार वाटावं असं

प्रेम असावं समुद्रासारखं 
खळबळाटातही शांत वाटावं असं

प्रेम असावं पावसाच्या सरींसारखं
बरसून गेल्यावरही हवहवहवसं वाटावं असं

प्रेम असावं गुलाबाच्या फुलासारखं
काट्यांनाही झुगारून बहरून यावं असं

प्रेम असावं तुझ्या-माझ्यासारखं
असूनही नसल्यासारखंनसूनही असल्यासारखं वाटावं असं


Thursday, June 14, 2018

Parchhai....

ना आॅंसू दिखते हैं ना हॅंसी दिखती हैं
भीड में हर किसीकी सिर्फ परछाई दिखती हैं

अपना कहलानेवाले सब जैसे गुम हो गए हैं
साथ में बटोरी सारी यादें बिखर गए हैं

यूॅं तो हर कोई जाना पहचानासा लगता हैं
ढूंढने पर मगर हर चेहरा पराया बन जाता हैं

वक्त की रफ्तार से सब दौडते जा रहे हैं
रिश्तोंकी अहमियत को कुचले जा रहे हैं

सही-गलत की गुत्थी सुलझती ही नही हैं
दिल की उलझन बिगडती जा रही हैं

कश्मकश मन की बढती ही जा रही हैं
आईना भी अब पहचाननेसे इन्कार कर रहा हैं

Sunday, March 13, 2016

Kora Kagaz..










कोरे कागज पे कुछ लफ्झ गिरे पडे हैं..
किसी के सहलानेका इंतेझार जैसे कर रहे हैं..

एक दुसरे से वो अन्जान है, या शायद है एक दुसरे से वो खफा..
न कोई दुरिया है उनमें,नाही कोई नजदिकीया..

वक़्त गुजरते,कुछ लफ्झ अल्फाझ बनके एक दूसरे में बंध जाते है..
कोरे कागझ पे कोई कविता खुद ही जैसे जनम लेती है..

कुछ लफ्झ लेकीन कोने में ही रह जाते है..
सब का साथ निभाते निभाते खुद अकेले ही बह जाते है..

कागज मगर बिखरे लफ्झोन्को समेटनेकी कोशिश में लगा रहता है..
हर लम्हा मन जैसे जहन में पले खयालों को सुलझानेमें उलझा रहता है..

न जाने क्यू ये कागज हमारे मन जैसे लगने लगता है..
जब हसते रोते पलोन्को खुद में समाने की कोशिश में, कभी कभी ये कोरा ही रह जाता है..


Saturday, January 3, 2015

Rishtein........

ज़िन्दगी की राह में  कई रिश्तें बनते है...
कुछ रिश्तें सदा साथ रहते हैं, कुछ बस तजुर्बा देके बिछड़ते हैं...
कुछ उलझते  है, कुछ सुलझते है, कुछ गिरकर फिर संभलते हैं..

कभी ये ख़ुशी देते है, कभी यही गम भी बन जाते हैं..
ज़िन्दगी की सतह पर अपने निशान पीछे छोड़ जातें हैं..

हर रिश्तें की अपनी पहचान हैं..
कुछ मैं ख़ुशी हैं, कुछ में  है ग़म , कुछ कभी घुटन से बन जाते  हैं...

कुछ में अलग  रास्तें होकर भी एक मंज़िल होती हैं..
कुछ में रास्ता एक होकर भी कभी मंजिले अलग बन जाती हैं..

रिश्तोंका  बनना , रिश्तोंका टूटना ज़िंदगी का उसूल हैं..
 जो हाथ थामे, मुस्कुराए, सफर सुहाना बनाते है, वही रिश्तें दिल के करीब रह जाते हैं..


Monday, August 25, 2014

Paus

कोसळणारा पाऊस मला खूप आवडतो

आपल्या सरींनी तो नजरेसमोरचं जग धूसर करून टाकतो,

काही काळ सगळं विसरायला लावतो,

थंडगार थेंबांनी मनाला मोहरून टाकतो,

मादक सुगंधाने नवीन चैतन्य घेउन येतो,

चोहीकडे जणूे उत्साह बहरतो!

खूपदा मनात विचार डोकावतो, या पावसासारखं आयुष्य पण धुवून काढावं,

जुनं दुःख विसरावं, नवं सुख घेऊन पुढे जावं,

शुभ्र सरींसारखं फक्त आनंद घेऊन जगावं,

मन धावेल त्या दिशेला त्या च्या सारखचं बरसावं!

पण हळूहळू त्या चं कोसळणं मंदावतं,

धूसर दिसणारं जग स्पष्ट दिसायला लागतं,

त्याचं बरसणं जेव्हा पूर्णपणे थांबतं , तेव्हा सगळं पुन्हा शांत होतं,

आकाश स्वच्छ झाल्यासारखं मनातलं वादळही मग अलगद ओसरतं,

स्वतःशीच हसत, नजर सावरत, पाऊल आपोआप घरी परततं!



Sunday, July 21, 2013

When I walked in your shoes

Dear friend, it's been some time now..I haven't heard back from you..
Feels as if for you,am one of those strangers waiting in cue..

I think as if you have forgotten me altogether,
Have given up on all memories about the time we had spent together

Of course I am very proud of you,when I watch you climbing mountains,
With all the challenges that come across, you achieve success in tonnes

You keep saying to everyone, Life is busy,
Has it really been, or am I being too fussy?

Just to make sure,I decided to step into your shoes,
To explore about your life and how your boat sails

Honestly, I wasn't even able to walk with your shoes on, 
I wonder how do you manage to run with them all along

It is not easy to lead your life,I now understand,
Even in such a case, how do you manage to stand

I decide to put your shoes back and wear mine,having learnt enough lessons
I tried to look for my pair,and found them sitting on someone else's legs

My expressions turned from angry to happy, while checking on the person wearing them
It was 'you' after all this time, who had also been taking a walk through my life

We both smiled at each other, didn't say a word and gave a friendly nod
Headed towards our favoutite hanging place where we loved to go; 'without' our shoes on

Sunday, May 19, 2013

Do Pattonki Kahani

वो पत्तोंकी सरसराहट तेरी याद दिलाती है,
तेरी खुशबू के रूप में जैसे तुझे ढूंढ लाती है

कुछ पत्ते अभी भी हरे हैं ,पेड़ जिनसे भर गए है,
नीचे गीरे पुराने पत्तोंको मगर वो अब भूल गए है

उन टहनीयोंपे  कैसे हम भी साथ साथ रहते थे,
सूरज की गर्मी हो,या बारिश की बूंदे हो,हम खुश थे

                               
                                  फिर जाने क्या बात हुई जो हमें यु पड़ा बीछडना,
                                 क्या हर पत्ते के नसीब में होता है यु ही गिर जाना?

                                  ज़मीन पे पता नहीं तेरा ठिकाना अब कहा रहता है,
                                  इसीलिए शायद हर आहट में दिल तुझे ही ढूँढता है

                                 कही दूर ही सही, मगर तू भी ज़मीन पे है ये अच्छा है,
                                क्यूंकि इसी मिटटी में मिलकर, कल हमें फिर से पेड़ पर साथ उगना है